
पिघला नीलम सा बेहता हुआ ये समा ....
नेली नीली से खामोशिया....
ना कही हे ज़मीन............... ना कही.... आसमान.....
सर सरती हुई टहनियाँ ..............पतियां
कहरहिया की ...बस एक तुम हो यहाँ.....
सिर्फ मे हूँ.....
मरी सांसे हे और मरी धड़कने.......
ऐसी गहराइयाँ........... .ऐसी तन्हाया
और मे.......... सिर्फ मे
अपने होने पे मुझपे यकीन आगया !!






















